उत्तराखंड बार काउंसिल ने की अधिवक्ता पर कार्रवाई, 5 साल के लिए लाइसेंस सस्पेंड

उत्तराखंड

रामनगर: नैनीताल के रामनगर के रहने वाले एक अधिवक्ता पर बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें पेशेवर कदाचार का दोषी पाया है. अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत अधिवक्ता पंजीकरण पांच वर्षों के लिए निलंबित कर दिया गया है. साथ 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है.

विधि जगत में अनुशासन और ईमानदारी की कसौटी पर खरा न उतरने पर रामनगर निवासी अधिवक्ता पर कड़ा शिकंजा कसा गया है. बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड, नैनीताल की अनुशासन समिति ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के अंतर्गत सुनवाई करते हुए अधिवक्ता पंजीकरण 5 वर्षों के लिए निलंबित कर दिया है.

ये है मामला: यह कार्रवाई वाद संख्या 16/2023 में दर्ज शिकायत के आधार पर की गई, जो अधिवक्ता मोहम्मद फिरोज द्वारा दाखिल की गई थी. शिकायत में मोहम्मद फिरोज ने आरोप लगाया था कि अधिवक्ता ने बिना अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) उत्तीर्ण किए खुद को स्वतंत्र अधिवक्ता घोषित कर रजा लॉ एंड टैक्स सॉल्यूशंस नाम से विधिक कार्यालय संचालित किया.

जबकि रजा लॉ एंड टैक्स सॉल्यूशंस नाम पहले से ही शिकायतकर्ता मोहम्मद फिरोज के विधिक कार्यालय के रूप में पंजीकृत था. इस कारण आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी और यह मामला सीधे तौर पर पेशेवर दुराचार की श्रेणी में आ गया.

जांच में हुआ खुलासा: बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने शिकायत पर गंभीरता से संज्ञान लिया और मामले की विस्तृत सुनवाई की. समिति के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य दस्तावेज, गवाहों और पक्षों की जिरह के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि अधिवक्ता ने न केवल बिना वैधानिक योग्यता प्राप्त किए स्वयं को अधिवक्ता घोषित किया. बल्कि जानबूझकर एक पूर्व से स्थापित विधिक संस्था के नाम का भी दुरुपयोग किया.

बार काउंसिल का स्पष्ट संदेश: अनुशासन समिति ने अपने निर्णय में कहा कि अधिवक्ता का यह आचरण विधिक पेशे की गरिमा और नैतिकता के विरुद्ध है. समिति ने टिप्पणी की कि ऐसा आचरण समाज में अधिवक्ता पेशे की छवि धूमिल करता है और इससे आम लोगों का भरोसा भी कमजोर होता है. इसके अतिरिक्त समिति ने 25 हजार का जुर्माना भी लगाया. जुर्माना नहीं देने पर निलंबन की अवधि छह महीने के लिए और बढ़ा दी जाएगी.

लॉ स्टूडेंट और न्यू रजिस्टर्ड एडवोकेट्स के लिए चेतावनी: यह निर्णय उत्तराखंड के नवपंजीकृत और नवप्रवेशी अधिवक्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि बिना आवश्यक परीक्षा और औपचारिकताओं को पूरा किए यदि कोई व्यक्ति स्वयं को अधिवक्ता घोषित करता है या किसी स्थापित नाम का गलत उपयोग करता है, तो उस पर बार काउंसिल द्वारा कठोर कार्रवाई की जाएगी.

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