मलिन बस्तियों को उजाड़ने के खिलाफ हरीश रावत का मौन व्रत, सरकार के आगे रखी दो बड़ी मांग 

उत्तराखंड

रामनगर: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को नैनीताल के रामनगर स्थित भगत सिंह चौक पर मौन व्रत रखकर राज्य सरकार के आगे दो बड़ी मांग रखी. उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह गरीबों के हक के लिए लड़ते रहे, इसलिए उन्होंने इस पवित्र स्थल को प्रतीक के रूप में चुना.

हरीश रावत ने कहा कि उनकी पहली मांग है कि मलिन बस्तियों के लोगों को मालिकाना हक दिया जाए. उन्होंने याद दिलाया कि जब कांग्रेस की सरकार थी, तब 2016 में विधानसभा में एक कानून पारित कर इन बस्तियों को वैधता दी गई थी. 1 हजार से अधिक लोगों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. लेकिन भाजपा सरकार ने आते ही इस प्रक्रिया को रोक दिया. तब से यह मामला लंबित है.

रावत ने कहा कि अब सरकार इन मलिन बस्तियों को उजाड़ने पर आमदा है. रिस्पना और बिंदाल जैसे क्षेत्रों में सैकड़ों घरों पर लाल निशान लगा दिए गए हैं. लेकिन पुनर्वास की कोई वैकल्पिक योजना नहीं बताई जा रही. लोगों को केवल उजाड़ने के नोटिस दिए जा रहे हैं. वे आतंक के साए में जी रहे हैं. यह अमानवीय है. पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य के कानूनों के अनुसार इन लोगों को संरक्षण प्राप्त है. बिना उचित मुआवजा और पुनर्वास के उन्हें हटाना गैरकानूनी है. सरकार को पहले पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए. फिर चाहे जितना विकास करें.

हरीश रावत की दूसरी मांग उन लोगों के लिए की, जो वर्षों से सरकारी भूमि पर छोटे-छोटे टुकड़ों में काबिज हैं. उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने फैसला लिया था कि ऐसे लगभग दो लाख लोग, जो किसी खेत, स्कूल या घर के पास की भूमि पर वर्षों से रह रहे थे, उन्हें मालिकाना हक दिया जाएगा. इसके लिए एक नाममात्र शुल्क निर्धारित किया गया और एक लाख से अधिक लोगों को इसका लाभ भी मिला. लेकिन एक लाख से ज्यादा गरीब आज भी इससे वंचित हैं और अब उन्हें हटाने के नोटिस दिए जा रहे हैं. ऐसे लोगों की आवाज बनना मेरा कर्तव्य है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार की कैबिनेट ने इन लोगों के नियमितीकरण का निर्णय लिया था. इसलिए बिना उचित प्रक्रिया और पुनर्वास के नोटिस देना अवैध है. उन्होंने मांग की कि सरकार इन मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक दे और उनकी बेदखली की कार्रवाई रोके.

पंचायत चुनावों पर कहा

पंचायत चुनावों को लेकर भी रावत ने सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हर बार सरकार चुनावों को लेकर लेटलतीफी करती है. निकाय चुनाव हो या पंचायत चुनाव, सिर्फ बयानबाजी हो रही है. जनता को कोई भरोसा नहीं है. उन्होंने चुनावों की तिथि जल्द घोषित के साथ ही जून या जुलाई के पहले हफ्ते में चुनाव कराने की मांग की.

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