मानसून सत्र खत्म और शुरू हुई सियासत !  2 घंटा 40 मिनट पर आमने –सामने BJP-CONG, दोनों एक-दूसरे पर लगा रहे आरोपों की झड़ी

उत्तराखंड

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा का 4 दिवसीय मॉनसून सत्र डेढ़ दिन में संपन्न करने पर विपक्षी दल कांग्रेस सरकार को घेरने की कवायद में जुट गई है. एक ओर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कार्यमंत्रणा समिति से अपना इस्तीफा दे दिया है. दूसरी तरफ कांग्रेस मात्र डेढ़ दिन चले मॉनसून सत्र के साथ ही तमाम मुद्दों को भुनाने की कवायद में जुट गई है. जिसकी मुख्य वजह है कि विपक्ष के विधायक सदन के भीतर कानून व्यवस्था और आपदा पर चर्चा की मांग कर रहे थे. लेकिन इन विषयों पर चर्चा करने के बजाय अनुपूरक बजट और विधेयक को पारित कर सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थापित कर दिया गया.

विधानसभा मॉनसून सत्र की शुरुआत 19 अगस्त को हुई जो 20 अगस्त की दोपहर 1.24 बजे तक ही चली. लेकिन सदन के भीतर विपक्ष की ओर से लगातार किए जा रहे हंगामे की वजह से इन डेढ़ दिन में सदन की कार्यवाही मात्र 2 घंटे 40 मिनट तक ही चली. इन 2 घंटे 40 मिनट के दौरान न सिर्फ 5315.39 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पारित किया गया, बल्कि 9 विधेयक भी पारित किए गए. मॉनसून सत्र के दौरान पारित हुए 9 विधेयक काफी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसके लागू होने के बाद तमाम व्यवस्थाएं बदल जाएंगी. ऐसे में बेहद कम समय के लिए संचालित हुए विधानसभा मॉनसून सत्र को लेकर विपक्षी दल विरोध करने की कवायद में जुटा हुआ है.

11 साल में 35 दिन सत्र संचालित: गैरसैंण के ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के पहले से ही भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आहूत किया जा रहा है. पहली बार साल 2014 में गैरसैंण में टेंट में सत्र आहूत किया गया था. जिसके बाद से अभी तक यानि इन 11 सालों में 10 बार विधानसभा सत्र आहूत हो चुके है और कुल 35 दिन सत्र संचालित हुआ है. लेकिन उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि सत्र के लिए लाखों रुपए खर्च किए गए और बिना चर्चा के ही सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. हैरानी की बात ये है कि इन डेढ़ दिन में सिर्फ 2 घंटे 40 मिनट ही सदन की कार्यवाही चली है. इसी कार्यवाही के दौरान 5315.39 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट और 9 विधेयक भी पारित हो गए.

कांग्रेस ने लगाया आरोप: यही वजह है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है. कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री संगठन सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि, ‘शर्म आनी चाहिए भाजपा सरकार को, कम से कम एक महीने का सत्र होना चाहिए था. गैरसैंण प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी है. बावजूद इसके ग्रीष्मकाल के दौरान सरकार वहां गई नहीं. जबकि मॉनसून के दौरान सरकार वहां गई. सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष 310 पर कानून व्यवस्था और आपदा पर चर्चा करना चाहता था. लेकिन सरकार ने कोई चर्चा नहीं की. जिससे स्पष्ट है कि राज्य में कानून व्यवस्था ध्वस्त है. इसलिए चर्चा नहीं की गई. पूरा प्रदेश आपदा से ग्रस्त है, इसलिए चर्चा नहीं की गई’.

भाजपा ने रखा अपना पक्ष: इस पूरे मामले पर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश जोशी ने सत्ता पक्ष की तरफ से अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि, ‘सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी विधायकों ने जिस तरह का कृत्य किया, उसे प्रदेश की जनता ने देखा है. लेकिन बावजूद इसके सरकार की मंशा बहुत स्पष्ट और साफ थी. अनुपूरक बजट को पास कराने और चर्चा के लिए विपक्ष विधायकों से आग्रह किया गया. खुद मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने भी वार्ता की. लेकिन विपक्षी सदस्यों ने बातचीत करना उचित नहीं समझा, जिसके चलते सरकार ने प्रदेश की रक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए अनुपूरक बजट को पास किया.

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