केदारनाथ आपदा में भी आपदाग्रस्त इलाके में नहीं जा पाए थे पीएम मोदी, इस बार मौसम ने रोके कदम

उत्तराखंड

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून के दौरान किस तरह की तबाही आई, यह पूरे देश ने देखा. इस मानसून की बारिश ने करीब 80 लोगों की जान ले ली. साथ ही कई लोग लापता हो गए. इसके अलावा तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर लोगों के आशियाने, खेत खलिहान सब तबाह हो गए. जिससे आर्थिक रूप से भारी नुकसान हुआ. इस आपदा ने कई परिवारों को बेघर कर दिया तो अपने भी छीन लिए. ऐसे में लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड पहुंचे. जहां उन्होंने आपदा पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा सुनी.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे करना था, लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया. ऐसे में उन्होंने देहरादून में बैठक लेकर नुकसान की जानकारी जुटाई. साथ ही आपदा राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा बैठक की. साल 2013 की आपदा के दौरान भी नरेंद्र मोदी हालातों का जायजा लेने आए थे. तब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उस दौरान वे आपदाग्रस्त केदारनाथ नहीं जा पाए थे.

ऐसे में उन्होंने देहरादून से ही आपदा की जानकारी जुटाई थी. साथ ही अपने गुजराती लोगों की सलामती की जानकारी ली थी. उस दौरान नरेंद्र मोदी ने आपदाग्रस्त केदारनाथ जाने की मांग की थी. तब बीजेपी ने ये आरोप भी लगाया था कि उन्हें जानबूझकर केदारनाथ नहीं जाने दिया गया. इस बार मौसम ने खलल डाला और वे आपदाग्रस्त इलाकों का दौरा नहीं कर पाए.

पीएम मोदी दौरा देगा मरहम: साल 2013 की आपदा के बाद से साल 2025 तक हर साल मानसून के दौरान उत्तराखंड ने कई जख्म झेले. हर साल यह बारिश न केवल चारधाम यात्रा को प्रभावित करती है. बल्कि, प्रदेश में भारी नुकसान पहुंचाने के साथ ही कई लोगों की जान भी लेती है. साल 2021, 2022 के अलावा साल 2024 और अब साल 2025 में भी बारिश ने उत्तराखंड को गहरे जख्म दिए हैं.

इस बार की बारिश सभी हिमालय क्षेत्र में इस कदर तबाही लेकर आई है, जिसने उत्तराखंड को तो केदारनाथ जैसी त्रासदी की दोबारा से याद दिला दी है. उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को जानने वाले लोगों का कहना है कि साल 2013 में आई आपदा से भी कई बड़ी आपदा इस बार साल 2025 में आई है. ऐसे में उत्तराखंड को केंद्र सरकार से बड़ा आर्थिक पैकेज मिलता है, तब ही कुछ हद तक लोगों के दर्द को कम किया जा सकेगा.

उस वक्त जो हुआ, लेकिन इस वक्त प्रदेश के लिए ये जरूरी है: वरिष्ठ जानकार आदेश त्यागी कहते हैं कि साल 2013 में जब उत्तराखंड में भीषण आपदा आई थी, तब भी नरेंद्र मोदी उत्तराखंड आए थे, लेकिन उस समय यूपीए की सरकार होने की वजह से वे तब चर्चाओं में आए थे, जब उन्होंने कहा था कि राज्य और केंद्र सरकार उन्हें केदारनाथ जाने नहीं दे रही है.

उस वक्त उत्तराखंड में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा थे, तब नरेंद्र मोदी उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उन्होंने हैदराबाद की एक रैली में केदारनाथ के पुनर्निर्माण की बात कही थी. हालांकि, उन्होंने उस वक्त ये भी आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था कि वो पुनर्निर्माण के काम को अपने हाथों से करवाना चाहते हैं. अब प्रधानमंत्री बनने के बाद आपदा जैसे मौके पर वे खुद उत्तराखंड आए हैं. यहां पर लोगों से बातचीत करके गए हैं.

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग ने तैयार किया नुकसान का एस्टीमेट: उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में अभी भी 90 लोग लापता हैं. राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रदेश में आपदा से हुए नुकसान का आकलन करके 5,700 करोड़ रुपए का एस्टीमेट तैयार किया है. इसके लिए उत्तराखंड शासन ने केंद्र को एक प्रस्ताव भी बनाकर भेजा है.

इस प्रस्ताव के बाद ही केंद्रीय टीम चार दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड के आपदाग्रस्त क्षेत्र का दौरा करने के लिए पहुंची थी. इसी टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके उत्तराखंड दौरे के दौरान पूरा अपडेट भी दिया. इसके साथ ही पीएम मोदी ने उत्तराखंड के तमाम अधिकारियों के साथ भी बातचीत की. वहीं, पीएम मोदी ने आपदा पीड़ितों से मुलाकात करने के बाद कहा कि आपदा से हुए नुकसान को देखकर उन्हें बहुत पीड़ा हुई.

बैठक में क्या कुछ हुआप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौसम की वजह से कुछ देरी से ही उत्तराखंड पहुंचे. देहरादून पहुंचने के बाद उन्हें सबसे पहले उत्तरकाशी के धराली में हवाई दौरा करके हालातों का जायजा लेना था. इसके बाद हेलीकॉप्टर से ही चमोली और टिहरी होते हुए देहरादून में एक हाई लेवल बैठक लेनी थी, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से उनका हेलीकॉप्टर उत्तरकाशी के लिए नहीं उड़ पाया.

ऐसे में उन्होंने एयरपोर्ट पर स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आपदा प्रबंधन से जुड़े तमाम अधिकारियों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ बैठक की. उत्तरकाशी, चमोली और अलग-अलग स्थान से पीएम मोदी से बातचीत करने के लिए 22 से ज्यादा आपदा प्रभावित लोगों को देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर बुलाया गया था.

ये वो लोग थे, जिन्होंने अपने घर और अपनों को इस मानसून में खोया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से बात की और उनकी पीड़ा को महसूस किया. इसके साथ ही 50 से ज्यादा आपदावीर भी मौके पर मौजूद रहे. पीएम मोदी ने सभी आपदा पीड़ितों की बारी-बारी से बात सुनी. पीएम मोदी ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के साथ पूरा देश उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों के साथ खड़ा है. हम सब मिलकर इस आपदा से हुए नुकसान का सामना करेंगे.

बैठक में मौजूद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के अधिकारियों ने उन्हें फोटोग्राफ एवं वीडियो दिखाए. साथ अन्य जानकारी के माध्यम से बताया कि उत्तराखंड में इस बार बारिश में किस तरह के हालात बने हैं. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य में अब तक क्या कुछ हुआ है, इस बात की भी जानकारी दी.

पीएम मोदी ने की ये घोषणाएं

  • पीएम मोदी ने उत्तराखंड में बाढ़ और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों के लिए1200 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता की घोषणा की.
  • मृतकों के परिवारों के लिए2 लाख रुपए और घायलों के लिए 50 हजार रुपए की अनुग्रह राशि की घोषणा.
  • हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिएपीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत व्यापक सहायता की घोषणा
  • प्रधानमंत्री मोदी ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर व्यक्त की अपनी संवेदना
  • एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा मित्र स्वयंसेवकों से भी मिले और उनके प्रयासों को सराहा
  • केंद्र सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली और पुनर्निर्माण के लिए सहयोग का दिया आश्वासन

उत्तराखंड में बाढ़ की स्थिति को लेकर एक समीक्षा बैठक की. राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान को देखकर बहुत पीड़ा हुई है. जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. इसके साथ ही मैं सभी घायल लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं. प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हम राहत और पुनर्वास सहित हर जरूरी इंतजाम तेजी से सुनिश्चित करने में जुटे हैं.“- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

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