दीवान कनवाल का निधन: उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को बड़ा झटका

उत्तराखंड देहरादून

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध और प्रगतिशील लोकगायक दीवान कनवाल के आकस्मिक निधन पर राजनीति और कला जगत में शोक का माहौल है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने उनके देहावसान पर गहरा दुःख प्रकट करते हुए इसे राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति करार दिया है। तिवारी ने कहा कि दीवान कनवाल केवल एक गायक नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाले विचारक भी थे।
 
अपने शोक संदेश में पी.सी. तिवारी ने कहा कि दीवान कनवाल ने अपनी सशक्त आवाज़ और संवेदनशील अभिव्यक्ति के माध्यम से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को न केवल समृद्ध किया, बल्कि उसे एक प्रगतिशील दृष्टि भी प्रदान की। उनके गीतों में पहाड़ की संस्कृति के प्रति गहरी समझ और आधुनिकता का अनूठा मेल था। तिवारी ने जोर देकर कहा कि कनवाल जी के जाने से उत्तराखंड के सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र में जो शून्य पैदा हुआ है, उसकी भरपाई करना निकट भविष्य में असंभव है।
 
लेख के अनुसार, दीवान कनवाल का व्यक्तित्व बहुआयामी था। गायकी के साथ-साथ वे अपने सेवाकाल के दौरान कर्मचारी आंदोलनों में भी बेहद सक्रिय रहे। उन्होंने हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर कर्मचारियों और साथियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। पी.सी. तिवारी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनके विचार और उनके संघर्ष की विरासत आने वाली पीढ़ियों और उभरते हुए लोक कलाकारों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।
 
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की ओर से पी.सी. तिवारी ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार और उनके असंख्य प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा प्रदेश इस दुःख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है। अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में दीवान कनवाल के योगदान को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

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