देहरादून: अस्पताल के ICU में आग लगने से महिला मरीज की मौत, छह अन्य भी झुलसे; दो की हालत गंभीर

उत्तराखंड देहरादून

देहरादून। देहरादून के पैनेसिया हॉस्पिटल में अचानक आग लग गई। जिससे मौके पर अफरातफरी का माहौल है। हादसे में आईसीयू में भर्ती एक 55 वर्षीय महिला मरीज की मौत हो गई है। तीन पुलिसकर्मी भी बचाव के दौरान झुलसे हैं। वहीं कुल 11 लोग घायल हुए हैं। घायलों में एक नवजात भी शामिल है।

कई मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। वहीं कैलाश अस्पताल में लाए गए छह मरीजों में से दो की हालत भी नाजुक बनी हुई है। बताया जा रहा है कि एसी में ब्लास्ट होने के कारण अस्पताल में आग लग गई थी।

जानकारी के मुताबिक पैनेसिया अस्पताल में बुधवार को आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर को खाली करा लिया गया।

गढ़वाल मंडलायुक्त विनय शंकर पांडेय व सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह घटनास्थल पहुंचे। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने भी घटनास्थल का जायजा लिया।

कई मरीज दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट

जानकारी के अनुसार अस्पताल में अचानक धुआं उठने लगा, जिसके बाद मरीजों और तीमारदारों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद अस्पताल स्टाफ और स्थानीय लोगों ने तुरंत मरीजों को वार्डों से बाहर निकालना शुरू किया। कई मरीजों को एंबुलेंस के जरिए दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया।

प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह एसी ब्लास्ट मानी जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग के बाद कुछ ही देर में पूरे परिसर में धुआं भर गया था। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी और आनन-फानन में रेस्क्यू शुरू किया गया।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। अधिकारियों के अनुसार स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। फायर विभाग ने बताया कि आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

खतरे में मरीजों की जिंदगी

दून में अधिकांश निजी अस्पताल और नर्सिंग होम मरीजों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। सीमित जगह, संकरे रास्ते और कमजोर फायर सेफ्टी इंतजामों के बीच अस्पतालों का संचालन हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।

पैनेसिया अस्पताल में लगी आग ने इन व्यवस्थाओं की असल तस्वीर सामने ला दी। हादसे के दौरान अस्पताल में धुआं भर गया और मरीजों को बाहर निकालने के लिए अफरा-तफरी मच गई। कई मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर बाहर लाना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अस्पतालों में रोज गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं, तब वहां आपदा से निपटने की तैयारी इतनी कमजोर क्यों है?

शहर में कई अस्पताल ऐसी इमारतों में चल रहे हैं, जहां न पर्याप्त पार्किंग है और न ही इमरजेंसी एग्जिट। आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तक आसानी से अंदर नहीं पहुंच सकतीं। प्रारंभिक जांच में आग की वजह एसी ब्लास्ट मानी जा रही है।

इससे अस्पतालों में लगे बिजली उपकरणों और एयर कंडीशनिंग सिस्टम की मानिटरिंग पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि फायर ऑडिट और माक ड्रिल जैसे जरूरी इंतजाम ज्यादातर जगह सिर्फ फाइलों तक सीमित नजर आते हैं। हादसा होने के बाद प्रशासन सक्रिय होता है, लेकिन कुछ दिन बाद फिर वही लापरवाही शुरू हो जाती है।

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