कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर की बढ़ाई जाएगी क्षमता, अब एक साथ दिखेंगे 32 बाघ और 48 गुलदार 

उत्तराखंड

रामनगर: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में अब एक साथ 32 बाघ और 48 गुलदार को रखा जा सकेगा. केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से मिली स्वीकृति के बाद यह संभव हुआ है. यह कदम वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.

रेस्क्यू सेंटर में होती थी ये परेशानी

वर्तमान में, ढेला रेस्क्यू सेंटर में 10 बाघ और 10 गुलदार के लिए बाड़े उपलब्ध हैं, जहां उनका उपचार और देखभाल की जाती है. हालांकि, बढ़ती संख्या के कारण यह क्षमता लगभग पूर्ण हो चुकी थी, जिससे घायल या हमलावर नए वन्यजीवों को स्थान देने में कठिनाई हो रही थी. इस स्थिति को देखते हुए, कॉर्बेट प्रशासन ने सेंटर की क्षमता बढ़ाने के प्रयास शुरू किए.

वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन में अहम कदम

लगातार प्रयासों के बाद, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने रेस्क्यू सेंटर की क्षमता बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान की है. इस स्वीकृति के तहत, अब सेंटर में 32 बाघ और 48 गुलदार को एक साथ रखा जा सकेगा. इसके अलावा, पांच हाथियों, हिरणों और पहली बार कुमाऊं क्षेत्र में घायल पक्षियों के इलाज की भी व्यवस्था की जाएगी. यह कदम वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे क्षेत्र में जैव विविधता को संरक्षित करने में सहायता मिलेगी.

रेस्क्यू सेंटर की क्षमता बढ़ने से अब अधिक संख्या में घायल और जरूरतमंद वन्यजीवों की देखभाल की जाएगी. जिससे वन्यजीवों के संरक्षण प्रयासों को और मजबूती मिलेगी. डॉ. साकेत बडोला, डायरेक्टर, सीटीआर

पीएम मोदी ने की थी घोषणा

30 हेक्टेयर में फैला यह रेस्क्यू सेंटर साल 2020 में बनकर तैयार हुआ था. लेकिन संचालन के लिए सीजेडए की अनुमति आवश्यक थी. तीन बार प्रस्ताव भेजने के बाद, अब जाकर मानकों के अनुसार डिजाइन और अतिरिक्त वन्यजीवों को रखने संबंधी प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2018 में कॉर्बेट पार्क के ढिकाला में भ्रमण के दौरान इस रेस्क्यू सेंटर की घोषणा की थी. जिसके बाद चार करोड़ की लागत से इसका निर्माण हुआ.

यह एक स्वागत योग्य कदम है, इससे वन्यजीवों के संरक्षण में मदद मिलेगी और उनकी देखभाल के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी. राजेश भट्ट, वन्यजीव प्रेमी

वन्यजीव प्रेमियों ने क्या कहा

रेस्क्यू सेंटर की क्षमता बढ़ाने की स्वीकृति से वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है. उनका मानना है कि इस पहल से घायल और उपचाराधीन वन्यजीवों के साथ-साथ पक्षियों का भी उचित इलाज संभव होगा, जो उनके संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा.

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