अंकिता भंडारी हत्याकांड: सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर नार्को टेस्ट के लिए तैयार, जानिए क्या कहा

उत्तराखंड देहरादून

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर जारी चर्चाओं के बीच पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर ने नार्को टेस्ट कराने पर सहमति जताई है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दोनों देहरादून स्थित अदालत पहुंचे। इस दौरान सुरेश राठौड़ ने अपनी सहमति से संबंधित पत्र मीडिया को दिखाया, जबकि उर्मिला सनावर ने अपने नार्को टेस्ट को मीडिया के सामने लाइव कराने की मांग उठाई।

दोनों की ओर से नार्को टेस्ट के लिए सहमति जताए जाने के बाद अब जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

सुरेश राठौड़ ने जांच में सहयोग की जताई सहमति

पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ शुक्रवार को देहरादून कोर्ट पहुंचे और नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी सहमति से संबंधित पत्र मीडिया के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वह जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं।

राठौड़ ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी के खिलाफ आरोप नहीं लगाए हैं। हालांकि, जब उनसे मामले से जुड़े वायरल ऑडियो और उसमें किए जा रहे दावों को लेकर सवाल पूछे गए, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ऐसे में वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता और उससे जुड़े दावों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

उर्मिला सनावर ने लाइव नार्को टेस्ट कराने की मांग की

उर्मिला सनावर ने भी शुक्रवार को अदालत पहुंचकर नार्को टेस्ट कराने पर अपनी सहमति जताई। उन्होंने दावा किया कि उनके नार्को टेस्ट से अंकिता भंडारी हत्याकांड, नीलम हत्याकांड समेत कई मामलों से जुड़े तथ्यों का खुलासा हो सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि उनका नार्को टेस्ट मीडिया के सामने लाइव कराया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक हो सके और सच्चाई सामने आ सके।

उर्मिला सनावर ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और दुष्यंत गौतम पर भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कथित वीआईपी की पहचान को लेकर फिर तेज हुई चर्चा

अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका और पहचान को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। हाल में वायरल ऑडियो और उससे जुड़े दावों के सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।

सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर की ओर से नार्को टेस्ट के लिए सहमति जताए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां इस संबंध में क्या कदम उठाती हैं और क्या इस प्रक्रिया से मामले से जुड़े सवालों के जवाब मिल पाते हैं।

फिलहाल, नार्को टेस्ट के लिए सहमति जताना अपने आप में किसी आरोप की पुष्टि या किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। मामले में तथ्यों की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

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