राहुल गांधी के खिलाफ SC/ST एक्ट में FIR, हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद ने लिया कानूनी मोड़

उत्तराखंड देहरादून नई दिल्ली राष्ट्रीय

हल्द्वानी। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 8 अगस्त को हल्द्वानी में हुई रैली के बाद रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी और राजनीतिक रूप ले चुका है। इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

मामले में जवाहर नगर निवासी अमित कुमार और विनोद आर्य की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को जातिगत और दलित विरोधी घटना के रूप में पेश किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने इसे ‘छुआछूत’ से जोड़ते हुए कार्यक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की थी।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि रामलीला मैदान में किया गया कार्यक्रम धार्मिक अनुष्ठान और सफाई से संबंधित था तथा इसका मल्लिकार्जुन खरगे की जाति से कोई संबंध नहीं था। उनका यह भी दावा है कि कार्यक्रम में अनुसूचित जाति समुदाय के लोग भी शामिल थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी के बयान से समुदाय की भावनाएं आहत हुईं और कार्यक्रम को जातिगत रूप देने का प्रयास किया गया।

पुलिस ने अमित कुमार की तहरीर के आधार पर FIR संख्या 297/2026 दर्ज की है। दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने से संबंधित) और धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने से संबंधित) के साथ ही SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(q) लगाई गई है। मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है।

राहुल गांधी ने भी की थी कार्रवाई की मांग

इस विवाद में दिलचस्प पहलू यह है कि राहुल गांधी ने स्वयं रामलीला मैदान के कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए इसे ‘छुआछूत’ से जोड़ा था। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की थी।

अब उसी विवाद में शिकायतकर्ताओं की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की धारा लगाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

जांच के बाद साफ होगी स्थिति

फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के दावे सामने हैं। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि राहुल गांधी के बयान में कानून के तहत जातिसूचक अपमान, समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने या अन्य आरोपित अपराधों के आवश्यक तत्व मौजूद थे या नहीं।

मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस बीच राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान के ‘शुद्धिकरण’ विवाद को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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