चंपावत के बनबसा में पहली बार हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक, विकास और सीमांत क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस

उत्तराखंड

चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक शुरू हुई। प्रदेश के इतिहास में पहली बार देहरादून से बाहर चंपावत जिले में कैबिनेट बैठक आयोजित की जा रही है। सुबह 11 बजे शुरू हुई इस बैठक को सीमांत क्षेत्रों के विकास और शासन को जनता के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

कैबिनेट बैठक के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के बनबसा पहुंचने का कार्यक्रम पहले ही निर्धारित कर लिया गया था। शनिवार, 3 अक्टूबर को ही कैबिनेट मंत्री और संबंधित अधिकारी बैठक की तैयारियों के लिए बनबसा रवाना हो गए थे।

उपनल कर्मचारियों और पीजी डॉक्टरों के प्रस्तावों पर हो सकती है चर्चा

अक्टूबर महीने की पहली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें उपनल कर्मचारियों के मानदेय और सेवा संबंधी विषयों, पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में वृद्धि तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा विभाग से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख हैं।

इसके अलावा, इसी महीने 26 अक्टूबर से पहले प्रस्तावित विधानसभा सत्र को लेकर भी निर्णय लिया जा सकता है। बैठक में विधानसभा सत्र की तिथियों और स्थान को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय कैबिनेट की आधिकारिक कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।

सीमांत क्षेत्रों के विकास को मिलेगी प्राथमिकता: सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अब कैबिनेट की बैठकें केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य स्थानीय समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के सामने लाना है।

उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं हैं, बल्कि ये हमारी सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी भी हैं। सरकार की प्राथमिकता सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शासन को जनता के और करीब लाना है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट की बैठकें आयोजित होने से स्थानीय परिस्थितियों, जन अपेक्षाओं और विकास की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझने तथा उन पर त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। उत्तराखंड के हर क्षेत्र का संतुलित विकास राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है। सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक विकास की गति समान रूप से आगे बढ़ाई जाएगी।

पर्वतीय जिलों के विकास पर सरकार का पूरा फोकस: सौरभ बहुगुणा

कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने चंपावत में कैबिनेट बैठक आयोजित करने के फैसले को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सीमांत जिलों और बॉर्डर एरिया पर विशेष ध्यान देना है। पर्वतीय जिलों के विकास को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि चंपावत में कैबिनेट बैठक आयोजित होने से स्थानीय लोगों के बीच यह संदेश जाएगा कि सरकार उनकी समस्याओं और जरूरतों के प्रति संवेदनशील है। बैठक में प्रदेश के हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगने की उम्मीद है।

बनबसा में कैबिनेट बैठक से स्थानीय लोगों में उत्साह: सतपाल महाराज

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी चंपावत के बनबसा में कैबिनेट बैठक आयोजित करने के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल से स्थानीय लोगों में काफी उत्साह है। लोगों के बीच यह सकारात्मक संदेश गया है कि सरकार अब उनके बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं और विकास की जरूरतों को समझने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चंपावत में कैबिनेट बैठक आयोजित करने का निर्णय एक अच्छा संदेश देने वाला कदम है।

चंपावत में आयोजित यह कैबिनेट बैठक न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के विकास, स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देने और प्रदेश में विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

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