उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल तय, तीन साल से एक ही जिले में जमे अफसरों के होंगे तबादले

उत्तराखंड देहरादून

निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे निर्देश, गृह जिले में तैनात चुनाव से जुड़े अधिकारियों को भी हटाने की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी बनाने के लिए आयोग ने प्रदेश में लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों के तबादले के निर्देश दिए हैं। आयोग के इस आदेश के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की संभावना बढ़ गई है।

निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर चुनाव से सीधे जुड़े अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव कार्य में प्रत्यक्ष रूप से शामिल अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा। इसके साथ ही निर्धारित अवधि से अधिक समय तक एक ही जिले में कार्यरत अधिकारियों का स्थानांतरण भी सुनिश्चित करना होगा।

28 मार्च 2027 को समाप्त होगा विधानसभा का कार्यकाल

आयोग के पत्र के अनुसार, उत्तराखंड की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत निर्वाचन आयोग ने अपनी तबादला नीति के प्रभावी अनुपालन के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को किसी भी प्रकार के स्थानीय प्रभाव, पक्षपात और प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखना है।

प्रशासनिक और पुलिस महकमे में तैयार होगी सूची

निर्देशों के बाद शासन स्तर पर ऐसे अधिकारियों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, जो अपने गृह जिले में तैनात हैं या लंबे समय से एक ही राजस्व जिले में सेवाएं दे रहे हैं। चुनाव से संबंधित जिम्मेदारियां निभाने वाले प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा कर नियमानुसार तबादले किए जाएंगे।

चुनाव से पहले बड़े फेरबदल के संकेत

निर्वाचन आयोग के निर्देशों को विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इन निर्देशों के अनुपालन में आने वाले समय में प्रदेश के प्रशासनिक और पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर तबादले हो सकते हैं। इससे चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने का रास्ता साफ होगा।

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