नारी सम्मान और भारतीय संस्कृति की परंपराओं को आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व: डॉ. नरेश बंसल
देहरादून। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष डॉ. नरेश बंसल ने महानवमी और विजयदशमी के पावन पर्व पर देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शारदीय नवरात्र की अष्टमी के अवसर पर उन्होंने देहरादून स्थित अपने आवास पर सपरिवार कन्या पूजन कर मां दुर्गा के स्वरूप में पूजित कन्याओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस दौरान डॉ. बंसल ने विधि-विधान से कन्याओं के चरण पखारे, उनका पूजन किया और उन्हें भोजन कराया। साथ ही दक्षिणा एवं उपहार भेंट कर उनका सम्मान किया। उन्होंने इस अवसर पर देश और प्रदेश की प्रगति, खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की।
डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि भारतीय संस्कार, संस्कृति और रीति-रिवाज हमारी पहचान हैं। इन परंपराओं के प्रति लोगों में सम्मान और जिज्ञासा है, लेकिन इन्हें जीवंत बनाए रखने के लिए इनका पालन करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का दायित्व है कि अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन्हें आत्मसात कर सकें।
उन्होंने कहा कि शारदीय नवरात्र नारी गरिमा और शक्ति की उपासना का पर्व है। जिस समाज में नारी की पूजा और सम्मान किया जाता है, वह समाज स्वयं ही सशक्त और समर्थ बनता है। नवरात्र का पर्व शक्ति की आराधना के साथ-साथ आधी आबादी के सम्मान का भी प्रतीक है।
डॉ. बंसल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीनकाल से ही नारी सम्मान को विशेष महत्व दिया गया है। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः’ अर्थात जहां नारी की पूजा और सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। यह विचार भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान और उसकी गरिमा के महत्व को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि नवरात्र में जगतजननी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना सनातन धर्म की पवित्र एवं उदात्त परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व समाज को नारी की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रति जागरूक करने के साथ ही महिलाओं के सशक्तीकरण की प्रेरणा भी देता है।
