पौड़ी में गुलदार का आतंक: एक साल में 12 लोगों की मौत, मासूम बच्ची को निवाला बनाने के बाद भड़का ग्रामीणों का गुस्सा

उत्तराखंड

विधायक राजकुमार पोरी का ग्रामीणों ने किया घेराव, करीब दो घंटे तक गाड़ी में बैठे रहे विधायक

वन मंत्री सुबोध उनियाल और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी, ग्रामीणों ने की गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग

पौड़ी। जिले में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन गुलदार के हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पिछले एक साल के भीतर पौड़ी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों में गुलदार के हमले की 15 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें 12 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।

मंगलवार शाम खांड्यूसैंण-वजली क्षेत्र में गुलदार ने एक मासूम बच्ची को अपना निवाला बना लिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी को लोगों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक का घेराव कर वन विभाग और शासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए।

इस दौरान ग्रामीणों और विधायक के बीच धक्कामुक्की की स्थिति भी पैदा हो गई। हालात बिगड़ते देख विधायक को उनकी गाड़ी में बैठाया गया, लेकिन ग्रामीणों ने वाहन को चारों ओर से घेर लिया। करीब दो घंटे तक विधायक गाड़ी के भीतर ही बैठे रहे। इस दौरान ग्रामीण लगातार उन्हें बाहर आने की मांग करते रहे। आक्रोश की स्थिति यह रही कि एक बुजुर्ग महिला विधायक की गाड़ी के बोनट पर चढ़कर प्रदर्शन करने लगी।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। देर रात तक पूरा खांड्यूसैंण क्षेत्र ‘वन मंत्री पौड़ी आओ’ और ‘गुलदार-भालू से हमें बचाओ’ जैसे नारों से गूंजता रहा।

ग्रामीणों का कहना था कि जनप्रतिनिधियों का काम केवल किसी बड़ी घटना के बाद घटनास्थल पर पहुंचकर संवेदना जताना नहीं है, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। जब गांवों में लंबे समय से गुलदार का खतरा बना हुआ है और लगातार जानें जा रही हैं, तो समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर शासन और वन विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार क्यों कर रहे हैं? ग्रामीणों का आक्रोश साफ संकेत दे रहा था कि अब केवल आश्वासन और औपचारिक दौरों से काम नहीं चलने वाला। उन्होंने क्षेत्र में गुलदार के आतंक से निजात दिलाने और ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

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